खुद को कर अलग उनसे!!!
“ खुद को कर अलग उनसे जो ” खुद को कर अलग उनसे, जो तुझे कभी समझ न पाए, तेरी खामोशी के पीछे छुपे जज़्बात, वो कभी पढ़ न पाए। तूने दिल से सब कुछ दिया, पर उन्हें उसकी कदर न हुई, तेरे आँसुओं की भी कीमत, उनकी नजर में कुछ न रही। फिर क्यों थामे बैठा है उन्हें, जो तेरे कभी थे ही नहीं, अब खुद को संभालना सीख, जो चला गया, वो तेरा था ही नहीं। खुद को कर अलग उनसे, और खुद के करीब आ, जहाँ तू ही तेरा सहारा हो, वहीं से नई शुरुआत कर जा… अब ना मूड तू पीछे कभी मंज़िल की तराफ तू जा काटे तो है बहोत मगर गुलाब की कदर तू जान !!!!